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तराई की मातृ देवियाँ” का विमोचन साहित्यकारों की उपस्थिति में संपन्न

महराजगंज: बड़हरा रानी गांव निवासी डॉ. सुनीता, जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है, द्वारा लिखित नारीवादी अध्ययन पर आधारित पुस्तक “तराई की मातृ देवियाँ” का विमोचन रविवार को सेंट जोसेफ स्कूल, महराजगंज के सभागार में भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता एवं शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की।

मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व इतिहासकार डॉ. आर.के. मिश्रा ने कहा कि यह पुस्तक मातृदेवियों पर हिंदी में लिखा गया पहला गंभीर अध्ययन है। इसमें भारत और नेपाल की देवी परंपराओं को नारीवादी दृष्टिकोण से रेखांकित किया गया है, जो अपने आप में एक अनूठी उपलब्धि है।

डॉ. राम नरेश राम, सहायक आचार्य, हिंदी विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने कहा कि यह पुस्तक डॉ. सुनीता के पीएचडी शोध का संशोधित रूप है। यह विषय शोध की दृष्टि से अपेक्षाकृत कम स्पर्श किया गया है, जिससे इसकी प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है।

पूर्व विभागाध्यक्ष, रक्षा अध्ययन विभाग, डॉ. परशुराम गुप्ता ने ऐतिहासिक सन्दर्भों को जोड़ते हुए देवी-परंपरा की सामाजिक पृष्ठभूमि को रेखांकित किया।

गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार सिंह ने कहा कि यह पुस्तक भारतीय मिथकों और आस्थाओं पर आधारित विमर्शों की परंपरा में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जिसकी तुलना वैश्विक स्तर के विमर्शों से की जा सकती है।

सी.जे. थॉमस, प्रबंधक, सेंट जोसेफ स्कूल ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि यह पुस्तक उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे क्षेत्रों में मातृदेवियों पर हुए शोध में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो एक नई दृष्टि प्रस्तुत करती है।

लेखिका डॉ. सुनीता ने कहा कि भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों ने देवियों के स्वरूप को आकार दिया है, और उनका यह अध्ययन ऐतिहासिक, सामाजिक तथा साक्षात्कार आधारित अनुसंधान पर आधारित है।

समारोह का संचालन करते हुए डॉ. शांतिशरण मिश्र, मीडिया प्रभारी, सिटीजन फोरम ने कहा कि यह पुस्तक दृष्टिकोण के महत्व को दर्शाती है और लोकपरंपराओं से जुड़ी देवियों पर गहरा शोध प्रस्तुत करती है।

अंत में लेखिका डॉ. सुनीता को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

इस दरम्यान डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, विमल कुमार पांडे, देवेश पांडे, सुरेंद्र पटेल, सुनील मिश्रा, पंकज मौर्या, संतोष श्रीवास्तव, संतोष तिवारी, दीपा शर्मा, डॉ. पुनीता त्रिपाठी, डॉ. आशुतोष त्रिपाठी, डॉ. पूनम वर्मा, हमीदुल्लाह खान, एडवोकेट डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, गणेश शंकर श्रीवास्तव, अशफाक अहमद, राहुल यादव, अंकित कुमार समेत अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

_____________________________________________________________________________________________ जनस्वराज हिंदी की संपादक प्रगति गुप्ता एक पत्रकार के साथ ही लेखिका भी हैं। सामाजिक विषयों, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन मुद्दों पर उनकी लेखनी विशेष पहचान रखती है। 'आवाज़ें ज़िंदा हैं' उनकी साहित्यिक अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अभी खरीदें यदि आप ऐसी कविताएं पढ़ना चाहते हैं जो दिल को छू जाएं और मन में नई ऊर्जा भर दें, तो 'आवाज़ें ज़िंदा हैं' आपके लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है। यह पुस्तक Amazon पर उपलब्ध है। आज ही अपनी प्रति मंगवाएं और शब्दों की इस संवेदनशील यात्रा का हिस्सा बनें। निचे लिंक पर क्लिक कर आर्डर करें. Purchase 'आवाज़ें ज़िंदा हैं'

Chandan Sharma

चन्दन शर्मा पत्रकार (Chandan Sharma Journalist) पिछले 10 सालों से मीडिया में एक्टिव हैं। उन्होंने खबर हलचल न्यूज के साथ काम करना शुरू किया और बाद में "द सर्जिकल न्यूज" नामक अपना खुद का समाचार पोर्टल और यूट्यूब चैनल शुरू किया। द सर्जिकल न्यूज का 5 साल तक सफलतापूर्वक संचालन किया। डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय पत्रकारिता में स्नातकोत्तर के दौरान शुरू हुए "जन स्वराज हिंदी" के संस्थापक सदस्य हैं। पत्रकारिता में परास्नातक चंदन शर्मा को डिजिटल न्यूज़, टेक्नॉलॉजी, ग्रामीण रिपोर्टिंग, रिसर्च पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक समाचार और वायरल न्यूज में दिलचस्पी है।

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