उगते सूर्य को अर्घ्य देकर लोकास्था का महापर्व छठ संपन्न
Chhath, the great festival of Lokastha, concluded by offering arghya to the rising sun

गोरखपुर/कुशीनगर: बिहार से पूर्वांचल होते हुए पूरे देश में फैला छठ का महापर्व धूमधाम से संपन्न हो गया। व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस पर्व पर सुख समृद्धि के कामना की।
इससे पहले छठ व्रत का महापर्व धूमधाम से विभिन्न क्षेत्रों में मनाया गया। डाला छठ के अवसर पर शाम होते ही लोकधुनों पर छठी मैया के गूंज रहे गीतों के बीच लोकआस्था एवं सूर्योपासना का महापर्व डाला छठ पर तीन दिवसीय व्रत के बाद महिलाओं ने गुरुवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर डाला छठ का प्रथम सोपान पूरा किया।
राप्ती नदी के विभिन्न घाटों पर भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया गया जबकि शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती महिलाएं इस महापर्व का समापन करेंगी। पहली बार व्रत करने वाली महिलाओं ने गाजे-बाजे के साथ कोसी भरकर इस इस पवऀ की शुरुआत की।
ज्ञात हो कि भगवान भास्कर धरती के प्रत्यक्ष देवता हैं। उनकी अराधना, पूजा से जीव को ज्ञान, विज्ञान एवं मोक्ष प्राप्त होता है।
रंग-बिरंगे परिधानों में सजीं व्रती महिलाओं एवं युवतियां घर से घाट तक जाने वाली सड़कों पर जगमग रंग बिरंगी रोशनी के बीच ,कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए आदि छठ के परम्परागत गीतों, माथे पर दौरा रख गंगा घाटों तथा सरोवरों पर पहुंचकर अस्तलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। साथ ही पुत्र की कामना, दीर्घायु एवं परिवार के सुख-स्मृद्धि की प्रार्थना की।
कुशीनगर: जिले के विभिन्न पूजा स्थलों, सरोवरों एवं छठ घाटों के बीच आस्था हिलोरें ले रही थी। सरोवर पवित्रता का एहसास कर रहे थे। लोकआस्था के इस महापर्व पर मानों आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था। महिलाओं अलावा पुरूष भी इस आस्था के पर्व पर शामिल हुए। कुछ पुरुषों ने भी छठ का व्रत धारण किया और भगवान भास्कर से परिवार की उन्नति एवं स्वास्थ्य की कामना की।


