धान की उत्पादकता 34 कुंतल से बढ़ाकर 70-80 कुंतल प्रति हेक्टेयर करने की मांग

 

 

सेवराई। धान की फसल के लिए समर्थन मूल्य योजना के तहत शासन द्वारा वर्ष 2026-27 में प्रति हेक्टेयर निर्धारित की जा रही उत्पादकता को लेकर किसानों में नाराजगी है। स्थानीय तहसील क्षेत्र के किसानों ने गुरुवार को उपजिलाधिकारी गजराज सिंह को पत्रक सौंपकर धान की निर्धारित उत्पादकता बढ़ाकर 70 से 80 कुंतल प्रति हेक्टेयर किए जाने की मांग की। किसानों ने इस संबंध में शासन स्तर पर पत्राचार किए जाने का भी अनुरोध किया।

 

किसानों का कहना है कि वर्ष 2026-27 के लिए प्रति हेक्टेयर महज 34 कुंतल धान की उत्पादकता निर्धारित की जा रही है, जो उनकी वास्तविक उपज की तुलना में आधे से भी कम है। ऐसे में किसान अपनी पूरी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का लाभ नहीं उठा पाएंगे। इससे उन्हें अपनी शेष उपज खुले बाजार में बिचौलियों के हाथों बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

 

किसानों ने बताया कि इस वर्ष वर्षा की स्थिति कम रहने के कारण धान की खेती की लागत काफी बढ़ गई है। सिंचाई, खाद, बीज, कीटनाशक, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर किसानों को पहले की अपेक्षा अधिक खर्च करना पड़ रहा है। बढ़ती लागत के बीच यदि सरकारी खरीद के लिए उत्पादकता की सीमा कम रखी गई तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

 

किसानों का कहना है कि क्षेत्र में सामान्य परिस्थितियों में धान की पैदावार निर्धारित 34 कुंतल प्रति हेक्टेयर से कहीं अधिक होती है। इसलिए सरकारी खरीद के लिए उत्पादकता का निर्धारण स्थानीय कृषि परिस्थितियों और किसानों की वास्तविक उपज को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। किसानों ने मांग की कि उत्पादकता की सीमा कम से कम 70 से 80 कुंतल प्रति हेक्टेयर निर्धारित की जाए, जिससे अधिक से अधिक किसान अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेच सकें।

 

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उत्पादकता की सीमा में वृद्धि नहीं की गई तो आधे से अधिक धान को समर्थन मूल्य योजना के तहत बेच पाना संभव नहीं होगा और किसान बिचौलियों के माध्यम से कम कीमत पर उपज बेचने को विवश हो सकते हैं। इससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।

 

किसानों ने उपजिलाधिकारी से मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन को पत्र भेजकर निर्धारित उत्पादकता में संशोधन कराने की मांग की। इस दौरान किसान नेता भानु प्रताप सिंह, सुधीर सिंह, संदीप सिंह, प्रदीप सिंह, कमलेश सिंह, रामप्रवेश यादव, शंकर सिंह, वेंकटेश्वर सिंह, मिथिलेश सिंह, राकेश सिंह पम्मू आदि मौजूद रहे।

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