सोनहरियां वन और प्राचीन बाबा सिद्धनाथ मंदिर को अब पर्यटन मानचित्र पर मिलेगी नई पहचान

अजित कुमार सिंह
नगसर । क्षेत्र के सोनहरियां वन और प्राचीन बाबा सिद्धनाथ मंदिर को अब पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। प्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र को इको-टूरिज्म और धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल की है।
इसी क्रम में मंगलवार को लखनऊ से आए पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने विकास की संभावनाओं का गहन सर्वेक्षण कर ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषताओं की जानकारी जुटाई।पर्यटन विभाग के ईको टूरिज्म अधिकारी भानु प्रताप त्रिपाठी और जेडी वाराणसी दिनेश कुमार ने सोनहरियां वन क्षेत्र, सिद्धनाथ मंदिर परिसर और आसपास के भूभाग का दौरा किया। अधिकारियों ने बताया कि सोनहरियां वन और सिद्धनाथ मंदिर क्षेत्र को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से लैस करने के लिए लगभग ढाई करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजने का निर्णय लिया गया है।प्रस्तावित विकास कार्यों में बेहतर पहुंच मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधा, सौंदर्यीकरण, हरित विकास, पेयजल, सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक-प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाले अन्य कार्य शामिल होंगे।ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 35 बीघे में फैला सोनहरियां वन करीब 500 वर्षों से सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक रहा है। यहां एक ही परिसर में हिंदू आस्था का केंद्र बाबा सिद्धनाथ मंदिर और मुस्लिम समुदाय की मजार स्थित है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से दोनों समुदायों के लोग समान श्रद्धा और सम्मान के साथ यहां दर्शन और मत्था टेकने आते हैं। मेलों और धार्मिक आयोजनों के दौरान आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता की अनूठी तस्वीर देखने को मिलती है।
पर्यटन विभाग की इस पहल से क्षेत्रीय लोगों में उत्साह है। ग्रामीणों का मानना है कि इस क्षेत्र के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से न केवल इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।