गोरखपुर: मलवेरी स्कूल के नौनिहालों ने लिया सुवर्णप्राशन संस्कार का लाभ, गुरु गोरक्षनाथ मेडिकल संस्थान में हुआ भव्य आयोजन
Gorakhpur: Children of Malvari School took advantage of Suvarnaprashan Sanskar, a grand event was organized at Guru Gorakshanath Medical Institute
गोरखपुर: गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बालापार के आयुर्वेद शिशु एवं बाल रोग विभाग में गुरुवार को सुवर्णप्राशन संस्कार उत्सव का भव्य आयोजन हुआ। यह आयोजन आयुर्वेदिक स्वास्थ्य परंपराओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया, जिसमें सिसवा महराजगंज स्थित मलवेरी स्कूल के सैकड़ों बच्चों ने भाग लेकर सुवर्णप्राशन संस्कार का लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के सदस्य और प्रसिद्ध भजन गायक अमित अंजन ने मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्वलन के साथ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि “सुवर्णप्राशन संस्कार न केवल सनातन भारतीय परंपरा का हिस्सा है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास में भी अद्वितीय भूमिका निभाता है।”
प्रमुख हस्तियों ने की सहभागिता
मलवेरी स्कूल की निदेशक शुभ्रा सिंह जायसवाल ने भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता करते हुए इस प्राचीन संस्कार के प्रति गहरी आस्था और जागरूकता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली की नींव मजबूत होती है और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं से जुड़ाव बनता है।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सुवर्णप्राशन का महत्व
कार्यक्रम के संयोजक एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डा. त्रिविक्रम मणि त्रिपाठी ने जानकारी दी कि सुवर्णप्राशन एक सुरक्षित, वैज्ञानिक और प्रभावी आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, स्मरण शक्ति और बुद्धि को बढ़ाती है। यह प्रक्रिया बच्चों को दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है।

आयोजन में शामिल हुए विशिष्ट अतिथि
इस अवसर पर संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डा. अवनीश कुमार द्विवेदी, प्राचार्य प्रो. डा. गिरिधर वेदांतम, उप प्राचार्य डा. सुमित कुमार नायर सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षक एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
भविष्य की योजना
आयोजन के अंत में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि हर पुष्य नक्षत्र के अवसर पर सुवर्णप्राशन संस्कार उत्सव का आयोजन नियमित रूप से किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चे और अभिभावक इस स्वास्थ्यवर्धक परंपरा से लाभान्वित हो सकें।


