योगीराज बाबा गंभीरनाथ जी के योग परंपरा में योगदान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य उद्घाटन

गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय योग परंपरा में योगीराज बाबा गंभीरनाथ जी का अवदान” का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री एवं श्री गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ जी द्वारा किया गया।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की। अपने स्वागत संबोधन में उन्होंने कहा, “भारतीय ज्ञान, साधना और भक्ति परंपरा में नाथपंथ का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।”
महाकुंभ ने दुनिया को आस्था की ताकत दिखाई – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा, “आस्था, आर्थिकी का कारण बन सकती है। महाकुंभ ने दुनिया को इसकी ताकत समझाई। यदि पूर्व की सरकारों ने इसे पहचाना होता, तो प्रदेश संकट की स्थिति से नहीं गुजरता।”

उन्होंने भारतीय संस्कृति और योग परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा, “दुनिया में अनेक उपासना पद्धतियाँ हैं, लेकिन भारतीय मनीषा ने सदा कहा है – ‘एकं सद् विप्रा बहुधा वदंति’ अर्थात सत्य एक ही है, बस उसे प्राप्त करने के मार्ग अलग-अलग हो सकते हैं।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, “सिद्ध योगियों की परंपरा को संरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि इसे कोई अन्य देश पेटेंट न करा ले। भारत की समृद्ध योग साधना परंपरा ने पूरी दुनिया को योग का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक आधार समझाया है।”
योगीराज बाबा गंभीरनाथ जी का योग साधना में अद्वितीय योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि योगीराज बाबा गंभीरनाथ जी ने योग की विभिन्न अवस्थाओं को पार कर सिद्धि तक पहुँचाया और इसे लोककल्याण का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा,
“योग की कोई भी विधा हो – हठयोग, राजयोग, लययोग या मंत्रयोग – सभी का उद्देश्य आत्मसिद्धि और लोककल्याण है। बाबा गंभीरनाथ जी ने अपनी साधना से इस पथ को प्रशस्त किया।”
मुख्यमंत्री ने इस संगोष्ठी को गोरखपुर और संपूर्ण भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और इसके सफल आयोजन के लिए कुलपति प्रो. पूनम टंडन एवं आयोजन समिति को बधाई दी।
नाथपंथ का भारतीय ज्ञान साधना में विशेष स्थान – प्रो. पूनम टंडन
गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संबोधन में कहा, “भारतीय ज्ञान साधना और भक्ति परंपरा में नाथपंथ का विशेष स्थान है। शिव अवतारी गुरु गोरखनाथ जी ने इसे व्यवस्थित स्वरूप दिया, जिसे योगीराज बाबा गंभीरनाथ जी ने सिद्धि तक पहुँचाया।”
उन्होंने संगोष्ठी को विश्वविद्यालय की हीरक जयंती के अवसर पर अत्यंत प्रासंगिक बताया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. रविंद्र नाथ श्रीवास्तव का वक्तव्य
प्रसिद्ध साहित्यकार एवं नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. रविंद्र नाथ श्रीवास्तव ने कहा, “योगीराज बाबा गंभीरनाथ जी का जीवन सत्य और साधना का प्रतीक था। उन्होंने सिद्ध योग परंपरा को जीवंत रखा और उसे जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया।”
संगोष्ठी में चार महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने भारतीय योग परंपरा और योगीराज बाबा गंभीरनाथ जी के योगदान पर केंद्रित चार महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया।
योग परंपरा के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में विभिन्न विद्वानों और शोधकर्ताओं ने भारतीय योग परंपरा, नाथपंथ और योगीराज बाबा गंभीरनाथ जी के योगदान पर विस्तृत चर्चा की। इस आयोजन ने न केवल योग परंपरा के पुनरुद्धार में योगदान दिया, बल्कि शोध एवं अकादमिक विमर्श को भी एक नई दिशा प्रदान की।
संगोष्ठी के संयोजक प्रो. द्वारका नाथ ने अपने विचार व्यक्त किए, जबकि उद्घाटन सत्र का संचालन प्रो. हर्ष सिंहा ने किया।


