DDU Gorakhpur: गुवा ने “भारतीय स्त्री अतीत एवं वर्तमान के संदर्भ में” विषयक सेमिनार का किया आयोजन

DDU Gorakhapur (प्रगति गुप्ता): दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर में गुवा द्वारा बुधवार को “भारतीय स्त्री अतीत एवं वर्तमान के संदर्भ में” विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति ने कहा कि महिलाओं को सशक्त करने के लिए महिलाओ को खुद की मानसिकता भी बदलनी पड़ेगी। महिलाओं को आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा। महिलाओं को सशक्त करने के लिए पुरुषों के साथ ही महिलाओं को भी आगे आना पड़ेगा।
सेमीनार की मुख्य वक्ता एवं गुवा की पूर्व अध्यक्ष प्रो विमला दुबे ने अपने वक्तव्य में कहा कि नारी वह है जो नर हित में मानव हित में शामिल है। वर्तमान या पूर्व की लड़ाई यही रही है कि महिला खुद के नाम से जानी जाए। आज के समय में स्त्रियों को अवसर देने की आवश्यकता है। प्राचीन समय में महिलाओं को स्थान दिया जा रहा था लेकिन वर्तमान में भी इसकी आवश्यकता है। मनुस्मृति में भी कहा गया है कि भ्रूण हत्या करने वाले का छुआ हुआ अन्न स्पर्श योग्य नहीं होता है।
प्रो0 राजवंत राव ने कहा कि मिशन शक्ति 5.0 स्त्री की विगत इतिहास से लेकर भविष्य में कई तरह के अधिकारों की मांग करते हुए आज सशक्त हुई है। थेरी गाथाओं की स्त्रियों ने खुद के लिए खुला आकाश मांगा और उन्होंने अपने निष्क्रिय पतियों से दूर होने की खुशी मनाया। उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत की महिलाएं सशक्त रही हैं। श्रीमाला सिंह गर्जना ने समकालीन स्त्रियों की दिमाग, उनकी दक्षता और कुशलता का लिखकर वर्णन किया।
प्रो0 विनीता पाठक ने संबोधन में मिशन शक्ति हर महिला के सशक्तिकरण पर बोलते हुए कहा कि पुरुष के व्यक्तित्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका महिला की है। उसके परवरिस के लिए हम महिलाएं जिम्मेदार हैं क्योंकि हमने पुरूष को नैतिक रूप से शिक्षित नहीं किया है। महिलाओं को उनका इमोशन जकड़े हुए है। पुरुष को उसका सम्मान करना चाहिए। महिलाओं को सुरक्षा के लिए स्वयं पर निर्भर होना पड़ेगा।

कार्यक्रम में बीएससी की छात्रा सृष्टी जायसवाल ने महिलाओं की समाज मे सशक्तिकरण पर अपना शार्ट नोट का पाठन किया। इसके अलावा फाइन आर्ट के विद्यार्थियों अमृता सिंह, रोहित प्रजापति, अंजलि मिश्रा को पोस्टर के लिए पुरस्कृत किया गया। वहीं इसी कार्यक्रम के लिए रंगोली बनाने वाले छात्राओ कविता प्रजापति, अर्चिता, अंजीता, कीर्ति, किरण, शालिनी, संजीता को पुरस्कृत किया गया।
उक्त सेमिनार में प्रो0 उमा श्रीवास्तव, प्रो0 संगीता पाण्डेय, डॉ0 सुनैना गौतम, डॉ0 अरुंधति सिंह, प्रो0 सुनिता, प्रो0 उषा सिंह, प्रो0 शिखा सिंह, प्रो0 सुधा यादव, प्रो0 वीना बत्रा, प्रो0 अनुभूति दुबे, प्रो0 प्रज्ञा चतुर्वेदी, प्रो0 निधि चतुर्वेदी, डॉ0 अपर्णा पाण्डेय, डॉ0 कल्पना दिवाकर, डॉ0 विनोद कुमार एवं अन्य विश्वविद्यालय के शिक्षक एव विद्यार्थी शामिल रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ0 कुसुम रावत ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो0 नंदिता ने किया।


