गाजीपुर में ‘दशरथ मांझी’ बना आर्मी जवान, 70 लाख की लागत से बना रहे पुल

रविंद्र यादव का यह सराहनीय प्रयास गाजीपुर और आसपास के गांवों के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। दशकों से उपेक्षित इस क्षेत्र में अब ग्रामीणों के सहयोग से एक स्थायी पुल बनने की उम्मीद जगी है।

Ghazipur News: बिहार के माउंटेन मैन दशरथ मांझी को कौन नहीं जानता, जिन्होंने अकेले अपने दम पर पहाड़ काटकर सड़क बना दी थी। कुछ ऐसा ही काम अब गाजीपुर के आर्मी जवान रविंद्र यादव कर रहे हैं। उन्होंने बिना सरकारी मदद के गाजीपुर के नोनहरा थाना क्षेत्र के पयामपुर छावनी गांव और आसपास के 15 गांवों को जोड़ने के लिए मगई नदी पर पुल बनाने का संकल्प लिया।

बगैर सरकारी बजट, गांववालों के सहयोग से बन रहा पुल

रिटायर्ड आर्मी इंजीनियर रविंद्र यादव ने अपने रिटायरमेंट के 10 लाख रुपये इस पुल के निर्माण में लगा दिए। इसके अलावा, गांववालों से 60-70 लाख रुपये चंदा जुटाया गया। जो लोग आर्थिक मदद नहीं कर सके, उन्होंने श्रमदान कर पुल के निर्माण में हाथ बंटाया।


यह भी पढ़ें: Ghazipur Jail PCO : अब जेल अधीक्षक अरूण प्रताप सिंह भी निलंबित


क्यों जरूरी है यह पुल?

  • गाजीपुर के पयामपुर छावनी गांव सहित 15 गांवों को जोड़ने का कोई पक्का रास्ता नहीं था।

  • नदी पार करने के लिए लोग लकड़ी के अस्थायी पुल या नाव का सहारा लेते थे, जो बाढ़ में बह जाता था।

  • गाजीपुर शहर की दूरी 18 किमी है, लेकिन सड़क मार्ग से यह दूरी 42 किमी हो जाती है।

  • थाना मात्र 3 किमी दूर है, लेकिन सड़क मार्ग से 30 किमी घूमकर जाना पड़ता है।

गाजीपुर में 'दशरथ मांझी' बना आर्मी जवान, 70 लाख की लागत से बना रहे पुल

कैसे शुरू हुआ पुल निर्माण?

  • रविंद्र यादव, जो भारतीय सेना के इंजीनियरिंग कोर में थे, ने गांव लौटकर पुल निर्माण का फैसला किया।

  • 25 फरवरी 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने भूमि पूजन और शिलान्यास किया।

  • दो पिलर बन चुके हैं, अप्रोच रोड का काम पूरा हो चुका है और अब स्लैब की ढलाई का कार्य जारी है।

जनप्रतिनिधियों से नहीं मिली मदद

रविंद्र यादव का गांव भले ही गाजीपुर जिले में आता हो, लेकिन लोकसभा बलिया और विधानसभा मोहम्मदाबाद के अंतर्गत आता है। गांववालों ने कई वर्षों तक जनप्रतिनिधियों से पुल निर्माण की मांग की, लेकिन किसी ने ठोस कदम नहीं उठाया। यहां तक कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, जो गाजीपुर से सांसद और रेल राज्य मंत्री भी रह चुके हैं, उनके गांव के पास ही यह गांव स्थित है, फिर भी सरकारी मदद नहीं मिली।

105 फीट लंबा पुल, पूरी तरह जनता के सहयोग से बन रहा

रविंद्र यादव, जो सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक भी हैं, आर्किटेक्ट की मदद से पुल का निर्माण करा रहे हैं।

  • पुल की लंबाई: 105 फीट

  • नदी के भीतर दो मजबूत पिलर तैयार

  • अप्रोच रोड का निर्माण पूरा

  • अब स्लैब की ढलाई का कार्य चल रहा है

बाढ़ में टूट जाता था लकड़ी का पुल, घंटों इंतजार करते थे लोग

हर साल बाढ़ के समय, लकड़ी का पुल बह जाता था, और गांववालों को एकमात्र नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ती थी। इससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

जनस्वराज हिंदी के व्हाट्सएप्प ग्रुप में जुडने के लिए क्लिक करें:
https://chat.whatsapp.com/DuMQ0U5z85a0bIgrUgUMlU

Chandan Sharma

चन्दन शर्मा पत्रकार (Chandan Sharma Journalist) पिछले 10 सालों से मीडिया में एक्टिव हैं। उन्होंने खबर हलचल न्यूज के साथ काम करना शुरू किया और बाद में "द सर्जिकल न्यूज" नामक अपना खुद का समाचार पोर्टल और यूट्यूब चैनल शुरू किया। द सर्जिकल न्यूज का 5 साल तक सफलतापूर्वक संचालन किया। डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय पत्रकारिता में स्नातकोत्तर के दौरान शुरू हुए "जन स्वराज हिंदी" के संस्थापक सदस्य हैं। पत्रकारिता में परास्नातक चंदन शर्मा को डिजिटल न्यूज़, टेक्नॉलॉजी, ग्रामीण रिपोर्टिंग, रिसर्च पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक समाचार और वायरल न्यूज में दिलचस्पी है।

Don't try, this is illigal.