सेवराई में 9वीं मोहर्रम का जुलूस: ताजियेदारों ने निकाला पारंपरिक जुलूस

सेवराई। तहसील क्षेत्र के मोहर्रम की 9 वीं तारीख को क्षेत्र के उसीया गांव,देवल लहना, सेवराई में नमाज असर के बाद चौक पर नियाज़ व फातेहा ख्वानी के लोग एकत्र हुए।
वहीं उसीया गांव में 9वीं मोहर्रम को ताजियेदारों ने पारंपरिक जुलूस निकाला। जुलूस तेलिया द्वारा से शुरू होकर पारंपरिक मार्ग से चौक तक पहुंचा।जुलूस में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और इमाम हुसैन की शहादत को याद किया ,और या हुसैन के नारे लगा रहे थे।जुलूस के दौरान ताजिए और छड़ियां लेकर चलने की परंपरा का पालन किया गया।
अंजुमन के लोग मर्शिया पढ़ते हुए चौक की तरफ बढ़े।और इस्लामिक झंडे लेकर युवा जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे।अंजुमन अमन,अंजुमन बारबल,और अंजुमन मस्जिद के लोग जुलूस में शामिल हुए।कमेटी के अनुसार रविवार को मोहर्रम की दसवीं तारीख को जिसे यौमे आशूरा कहते लगभग तीन बजे मुख्य जुलूस निकलेगा।

*मोहर्रम का महत्व*

मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है, जो मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस महीने की 10वीं तारीख को यौमे आशूरा कहा जाता है, जो इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है। इमाम हुसैन पैगंबर मुहम्मद के नवासे थे और उनकी शहादत कर्बला की जंग में हुई थी।

*मोहर्रम के दौरान इस्लामी परंपराएं*

मोहर्रम के दौरान विभिन्न इस्लामी परंपराएं निभाई जाती हैं, जिनमें जुलूस, ताजिए, मातम और दान शामिल हैं। ये परंपराएं इमाम हुसैन की शहादत को याद करने और उनके बलिदान को सम्मान देने के लिए निभाई जाती हैं।

*सुरक्षा और सावधानी*

मोहर्रम के दौरान सुरक्षा और सावधानी बरतना बहुत महत्वपूर्ण है। प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं।ताकि जुलूस और अन्य कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किए जा सकें।

*मुस्लिम समुदाय के लिए महत्व*

मोहर्रम का महीना मुस्लिम समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। इस महीने में लोग अपने धार्मिक और सामाजिक कर्तव्यों का पालन करते हैं और इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से इरफान खान,सामु खान,जुनैद राइन,ताजियेदार नुरुल होदा खान,सोनू खान,तौफीक खान,शौकत खान,नैन खान,रियाज खान,आजाद खान रहे।

Don't try, this is illigal.