पोषण भी, पढ़ाई भी’ पहल के तहत तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

सेवराई।तहसील क्षेत्र के भदौरा ब्लॉक संसाधन केंद्र में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ पहल के तहत तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को संपन्न हो गया। इस कार्यक्रम में पहले और दूसरे बैच के 100 आंगनबाड़ी केंद्रों के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना तथा बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के स्तर में सुधार लाना है। यह प्रशिक्षण स्मार्ट टीवी के माध्यम से आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम का संचालन सीडीपीओ रंजू द्विवेदी की देखरेख में हुआ। प्रशिक्षकों की टीम ने प्रतिभागियों को शैक्षणिक नवाचारों, पोषण प्रबंधन और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी।
विभाग के अनुसार, तीसरे बैच का प्रशिक्षण आगामी गुरुवार से शुरू होगा। इस पहल का लक्ष्य अधिक से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लाभान्वित करना है। प्रशिक्षण में बच्चों में पोषण और शिक्षा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर विशेष जोर दिया गया।
इसमें कुपोषण की पहचान, उसके प्रबंधन और आंगनबाड़ी केंद्रों में गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति जैसे प्रमुख बिंदु शामिल थे। कार्यकर्ताओं को कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें उपचार केंद्रों पर भेजने के लिए भी निर्देशित किया गया।
सीडीपीओ रंजू द्विवेदी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों की शिक्षा और व्यक्तित्व विकास की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि सही पोषण से कुपोषण को दूर किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार द्वारा विकसित ‘नवचेतना’ और ‘आधारशिला’ पाठ्यक्रम बच्चों के समग्र विकास और सीखने की प्रक्रिया को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों से बच्चों की बौद्धिक, शारीरिक और सामाजिक क्षमताओं को मजबूत आधार मिल रहा है।
समापन समारोह में खण्ड विकास अधिकारी के के सिंह ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर विशेष प्रशिक्षक दीपक सिंह, मास्टर ट्रेनर महेंद्र त्रिपाठी सहित कई विभागीय अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र के बच्चों को बेहतर पोषण और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने में सहायता मिलेगी।

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