निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, न्यायिक कार्य से रहे विरत

सेवराई (गाजीपुर)। प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्ट्री कार्य को निजी कंपनी के माध्यम से संचालित किए जाने तथा पेपरलेस एवं पूर्णतः ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव के विरोध में बार एसोसिएशन सेवराई के अधिवक्ताओं ने गुरुवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विरोध स्वरूप अधिवक्ता पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहे, जिससे न्यायालयीन कार्य प्रभावित रहा।बार एसोसिएशन सेवराई की एक आवश्यक बैठक अध्यक्ष पारस राम की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार की नई व्यवस्था का विरोध जताया। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, तकनीकी संसाधनों और जागरूकता की कमी के कारण पूर्णतः ऑनलाइन एवं पेपरलेस व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है। इससे आम नागरिकों को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि स्टांप एवं पंजीयन विभाग के कार्यों को निजी हाथों में सौंपे जाने से अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, वसीकानवीसों तथा मुंशियों के समक्ष रोजगार का गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा। उन्होंने सरकार से इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए इसे जनविरोधी और अव्यावहारिक बताया।बैठक के बाद अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी नारे भी लगाए गए तथा चेतावनी दी गई कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।सभा का संचालन महासचिव सुमत सिंह कुशवाहा ने किया। इस अवसर पर अधिवक्ता अजय राय, पूर्व अध्यक्ष अयाज खान, शाहजहां खान, पूनम कुमार सिंह यादव, अब्दुल नसीम, उमेश प्रताप सिंह कुशवाहा, पारस नाथ सिंह, राम सेवक राम, वीरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार सिंह यादव, कौशल कुमार, राधा कृष्ण राम, हैदर खान, मोहम्मद वारिस अली अंसारी, भोला सिंह यादव, जितेंद्र उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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