आरपीएफ जवानो के हत्या की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझी,गहमर पुलिस हत्या का केस दर्ज कर छानबीन में जुटी है,अलग अलग टीमें भी घटना के राजफाश में जुटी हुई

सेवराई। (गाजीपुर) : बाड़मेर गोहाटी साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन में आरपीएफ जवान के हत्या की गुत्थी छह दिन बाद भी नहीं सुलझी। हालांकि गहमर पुलिस हत्या का केस दर्ज कर छानबीन कर रही है इसके अलावा आरपीएफ व जीआरपी के अलग अलग टीम भी घटना के राजफाश में जुटी हुई।यह घटना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।वही विभागीय चर्चा है पटना में आईजी की बैठक में इस घटना को लेकर कई लोगो पर गाज भी गिर सकती है।चंदौली से कुछ शराब तस्कर को उठाकर पूछताछ पुलिस भी कर रही है।
आरपीएफ जवानो की हत्या में पुलिस की एक टीम गोहाटी पूछताछ के लिए तो गहमर पुलिस व क्राइम ब्रांच की टीम पीडीडीयू जंक्शन जाकर कई साक्ष्य को इकठ्ठा किया है।आरपीएफ कर्मियों में इस बात की चर्चा भी जोरो पर है कि जल्द ही पटना में आरपीएफ के आईजी की होने वाली बैठक में इस घटना को लेकर पीडीडीयू से बक्सर तक कई कर्मियों पर गाज भी गिर सकती है।क्योंकि इस घटना ने आरपीएफ की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा का दंभ भरने वाली आरपीएफ पुलिस अपने ही जवानों की हत्या में शामिल हत्यारों को पकड़ने में निष्क्रिय साबित हो रही है।वही चंदौली से कुछ तस्करों को उठाकर पुलिस पूछताछ कर रही है।क्योंकि इस घटना को अंजाम देने में शराब तस्करों की संभावना आरपीएफ के उच्चाधिकारी भी मान रहे है।अगर पुलिस शराब के साथ पकड़े गए यूपी व बिहार के तस्करों को पकड़कर पूछताछ करती तो शायद कुछ सुराग हाथ लगता।घटना के बाद से ही दोनों जवानों का मोबाइल भी नहीं मिला।इस बारे में थाना निरीक्षक गहमर अशोक मिश्रा ने बताया कि जवानों की हत्या को लेकर हर पहलू पर जांच चल रही है।कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है।अन्य टीमें भी कार्य कर रही है।

शराब तस्करी पर लगाम लगाने में आरपीएफ और जीआरपी रही फेल

बिहार में पूर्ण रूप से शराब बंदी के बाद यूपी के शराब तस्कर और सक्रिय हो गए।पहले तो यह सड़क मार्ग से भारी मात्रा में शराब ले जाते थे लेकिन यूपी पुलिस की कारवाई से तस्करों ने ट्रेनों के माध्यम से शराब बिहार भेजने का नायाब तरीका ढूढा।राजधानी सहित मेल,एक्सप्रेस,पैसेंजर व स्पेशल व साप्ताहिक ट्रेनों को चुना और धीरे धीरे कार्य को शुरू कर दिया।पहले तो ट्रेनों में आरपीएफ व जीआरपी पुलिस के जवान तस्करों को पकड़ने लगे लेकिन बाद में जब इनसे गठजोड़ हो गया तो तस्कर भारी मात्रा में ट्रेनों के जरिये शराब लेकर बिहार जाने लगे और मुनाफा कमाने लगे।तस्करों पर कारवाई के बजाय पुलिस के आला अधिकारी ने भी अपनी आंखें मूंद ली।जवान भी कभी कभार ट्रेन से शराब पकड़कर अपनी पीठ थपथपा लेते थे।धीरे धीरे तस्करों का मनोबल बढ़ाने लगा और तस्कर जवानों के ही जान के दुश्मन बैन बैठे।अगर आरपीएफ व जीआरपी के आला अधिकारी पहले ही तस्करों पर कारवाई कर दिए होते तो शायद आज जवान जावेद व प्रमोद की मौत नहीं होती।

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