Gorakhpur News : टेराकोटा आभूषण बनाने के गुर सीख रहे प्रशिक्षु

Gorakhpur News (अनुराग मिश्र): गोरखपुर के राजकीय बौद्ध संग्रहालय में सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में मंगलवार को तीसरे दिन भी प्रशिक्षुओं को टेराकोटा के आभूषण बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) द्वारा आयोजित किया गया है। इस प्रशिक्षण शिविर में 80 से अधिक प्रशिक्षु शामिल हो रहे हैं।

इस प्रशिक्षण शिविर में आभूषण का निर्माण करके टेराकोटा को नई पहचान देने के साथ-साथ इससे जुड़े कलाकारों को आर्थिक रूप से मजबूती भी मिलेगी।

इस दौरान वहां उपस्थित मुख्य प्रशिक्षक दीपिका सिंह ने बताया कि टेराकोटा के अन्य उत्पाद दुनिया भर में प्रसिद्ध है। टेराकोटा से बने आभूषण भी काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। इस प्रशिक्षण में इस हुनर को सीख कर लोग अपना स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। प्रशिक्षण शिविर के समाप्ति पर 8 फरवरी को शामिल हो रहे प्रशिक्षुओं को बेहतर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाएगा।

क्या है टेराकोटा?

टेराकोटा एक प्रकार का रंग है जिसे चिकनी मिट्टी पर लगाने से बनाई गई आकृति विशेष बन जाती है। इसके बाद आकृति का रंग बहुत सालों तक बेरंग नहीं होता है। इसका उपयोग फूलों के बर्तन, पाइप, ईंटों और मूर्तियों को बनाने के लिए किया जाता है।

टेराकोटा मिट्टी के बर्तन टेराकोटा मिट्टी को पकाकर बनाए जाते हैं। टेराकोटा का रंग प्राकृतिक भूरा-नारंगी होता है।

टेराकोटा मिट्टी से हर तरह की आकृति बनाना आसान है। एक बार आकार देने के बाद, इसे सख्त करने के लिए 1,000-2,000° F तक गर्म किया जाता है। फिर ग्लेज़ की एक साधारण परत टेराकोटा को वाटरप्रूफ बनाती है।

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा साल 2018 में टेराकोटा को एक जिला एक उत्पाद (ODOP) में शामिल किए जाने के बाद इससे जुड़े शिल्पकारों के दिन बदल गए हैं और उन्हें आर्धिक रूप से आजादी मिली है। वहीं टेराकोटा ने गोरखपुर को भी वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टेराकोटा के उत्पाद वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हैं।

0
Uttar Pradesh Legislative Assembly Election 2027

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव - 2027 में किसकी सरकार बनेगी?

Chandan Sharma

चन्दन शर्मा पत्रकार (Chandan Sharma Journalist) पिछले 10 सालों से मीडिया में एक्टिव हैं। उन्होंने खबर हलचल न्यूज के साथ काम करना शुरू किया और बाद में "द सर्जिकल न्यूज" नामक अपना खुद का समाचार पोर्टल और यूट्यूब चैनल शुरू किया। द सर्जिकल न्यूज का 5 साल तक सफलतापूर्वक संचालन किया। डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय पत्रकारिता में स्नातकोत्तर के दौरान शुरू हुए "जनस्वराज हिंदी" के संस्थापक सदस्य हैं। पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त चंदन शर्मा को डिजिटल न्यूज़, टेक्नॉलॉजी, ग्रामीण रिपोर्टिंग, रिसर्च पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक समाचार और वायरल न्यूज में दिलचस्पी है।

Don't try, this is illigal.