Ghazipur: पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा द्वारा लिखित पुस्तक का हुआ विमोचन

Ghazipur: Book written by former MP Jagdish Kushwaha released

Ghazipur: एम.जे.आर.पी. पब्लिक स्कूल जगदीशपुरम गाजीपुर के जय माँ लक्ष्मी मेमोरियल सभागार मे दिनांक 16 दिसंबर 2024 को विद्यालय के संस्थापक व पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा द्वारा लिखित ‘पुनर्जागरण के लिए महापुरुषों का चिंतन व आंदोलन’ नामक पुस्तक का लोकार्पण किया गया, जिसमें विभिन्न जनपदों से आए बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों, तथा साहित्यानुरागियों ने निष्ठापूर्वक भाग लिया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सुदर्शन सिंह कुशवाहा ने अतिथियों का स्वागत किया और विद्यालय के प्रबन्धक राजेश कुशवाहा ने इस कार्यक्रम मे उपस्थित अतिथियों का अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मान किया। मुख्य अतिथि महोदया प्रो0 निर्मला एस मौर्य (पूर्व कुलपति वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर) ने कहा कि हमारा देश और समाज अपने दायित्व से विमुख होकर सुसुप्तावस्था में चला गया है। इस सोए हुए समाज और देश को जगाने के लिए श्री जगदीश कुशवाहा ने देश के महापुरुषों के अमृत संदेशों के माध्यम से जगाने का जो सराहनीय कार्य किया है वह एक सराहनीय प्रयास है।

इस पुस्तक का संदेश घर-घर,जन-जन तक जाना चाहिए ताकि देश में पुनर्जागरण आ सके और स्वस्थ समाज, परिवार तथा व्यक्ति का पुनर्निर्माण हो सके। इसके लिए ज्ञानार्जन अति आवश्यक है। जब तक व्यक्ति का ज्ञान चक्षु प्रबल नहीं होगा तब तक वह जागृत अवस्था में आ ही नहीं सकता है। वाराणसी से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार हीरालाल मिश्र ‘मधुकर’ (संपादक- ‘कविताम्बरा’) ने मुक्तकों के माध्यम से अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि रचनाकार में साहित्यबोध प्रारंभिक काल से ही विद्यमान था जो अनुकूल वातावरण पाकर इस 86 वर्ष की उम्र में प्रस्फुटित हुआ है।

इस पुस्तक के माध्यम से रचनाकार ने यह संदेश देने का सार्थक प्रयत्न किया है कि जिस समाज में हम रहते हैं वह अज्ञानता के कारण पिछड़ा हुआ है। उसे आगे बढ़ाने के लिए महापुरुषों के प्रेरणादाई अमृत संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने और उसके गूढ़ तत्वों को तार्किक ढंग से लोगों को बताने की आवश्यकता है जिससे कि जनचेतना जागृत हो सके। पुनर्जागरण के बिना देश समाज, परिवार तथा व्यक्ति का मौलिक विकास संभव नहीं है। वाराणसी से आये साहित्यकार गिरीश पाण्डेय ने विमोचित पुस्तक में उद्धृत वेद-मंत्र के सस्वर वाचन के साथ अपना विचार रखते हुए कहा कि समन्वय और समता का संदेश हमारे पुरुषों ने जो दिया है उसे पुनर्स्थापित करने के लिए रचनाकार अनुप्राणित है। इसीलिए इस कृति का सृजन किया है।

समाज के उत्थान के लिए उन महापुरुषों की प्रेरणादाई उक्तियों को जन सामान्य तक पहुंचाने का जो सार्थक प्रयास किया है उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम होगी। प्रखर विचारक माधवकृष्ण ने कहा कि आज हर व्यक्ति अथवा समुदाय किसी एक महापुरुष को आदर्श मानकर उसके घरौंदे तक ही अपने को सीमित कर लिया है। जो दीवार की तरह हमें अलग कर दिया है। इस पुस्तक में उन अनेक महापुरुषों के विचारों को महत्व दिया गया है जो हमारे लिए प्रेरणादाई हैं। इसमें दो पक्ष है। एक तो है सौंदर्य पक्ष और दूसरा है भाव पक्ष। जो वेद से प्रारंभ होकर बुद्ध तक जाता है। वही आगे चलकर गांधी और अंबेडकर तक पहुंचता है।

कुल मिलाकर हम यह कर सकते हैं कि यह पुस्तक हमें समन्वय का संदेश देती है। जो स्वस्थ और सकारात्मक समाज के निर्माण के लिए नितांत आवश्यक है। पुस्तक में समापन आलोचना से होता है, जो सत्य की स्थापना के लिए जरूरी है। डा ऋचा राय ने आधार वक्तव्य देते हुए पुस्तक का संक्षिप्त परिचय कराते हुए कहा कि यह पुस्तक देश और समाज के समग्र उत्थान के लिए पठनीय है। पुस्तक के लेखक जगदीश कुशवाहा ने अपने मनोभावों को व्यक्त करते हुए इस पुस्तक को लिखने की मनोवृति कैसे पैदा हुई उसका उल्लेख करते हुए अपने जीवन-संघर्ष का संक्षिप्त परिचय कराया जो श्रोताओं को भावविभोर कर देने वाला था।

इस अवसर पर  बालेश्वर विक्रम, डॉ सुभाष चन्द्र,कामेश्वर द्विवेदी, डाॅ0 रश्मि शाक्या, डाॅ0ललिता कुशवाहा,रामधारी यादव,गोपाल यादव,रामराज कुशवाहा,केशरी यादव,आदि ने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर अलगू कुशवाहा, जयप्रकाश कुशवाहा,मार्कण्डेय यादव, नरेंद्र, अनिल, विनोद, प्रभुनाथ, हरेंद्र कुशवाहा,दीपक,बृजेश,पवन समेत विद्यालय के उप प्रधानाचार्य श्री राकेश पांडे जी, दिनकर सिंह, अनुपमा वर्मा, हरी कुशवाहा, संजीव अग्रहरी, कृष्णा नन्द तिवारी, राजनारायन कुशवाहा, दीपक कुमार एवं अनेक साहित्यकार व शिक्षक गण उपस्थित रहे। विद्यालय के प्रबन्धक राजेश कुशवाहा जी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 गजाधर शर्मा ‘गंगेश’ ने किया।

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Pragati Gupta

प्रगति गुप्ता दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर कर चुकी हैं। इसके अलावा इन्हें साहित्य में रुचि है और कविताएँ लिखने का भी शौक है। वर्तमान में प्रगति जनस्वराज हिन्दी के संपादक के तौर पर काम कर रहीं हैं।

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