सीएम योगी ने साझा की बाबा गंभीरनाथ और गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़ी स्मृतियाँ

गोरखपुर (अनूप पटेल): उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योगीराज बाबा गंभीरनाथ से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं को साझा किया।
उन्होंने बताया कि जिस विश्वविद्यालय में हम कार्यरत हैं, उसकी नींव महाराणा प्रताप कॉलेज से रखी गई थी। इस कॉलेज के पहले प्रधानाचार्य अक्षय कुमार बनर्जी थे, जो कोलकाता विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रमुख रह चुके थे।
बाद में, वे योगीराज बाबा गंभीरनाथ के शिष्य बने और गोरखपुर आकर महाराणा प्रताप कॉलेज के प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत रहे। यही कॉलेज आगे चलकर गोरखपुर विश्वविद्यालय की आधारशिला बना।
योगीराज बाबा गंभीरनाथ के शिष्य और उनका योगदान
कोलकाता विश्वविद्यालय के एक अन्य विद्वान, जो साधक भी थे, योगीराज बाबा गंभीरनाथ के शिष्य बने और आगे चलकर योगी शांतिनाथ के रूप में प्रसिद्ध हुए। उनकी पुस्तक Experiences of a Truth Seeker को भारतीय दर्शन में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। उन्होंने भारतीय दर्शनों की गहरी व्याख्या की और शास्त्रार्थ के लिए विद्वानों को आमंत्रित किया।
योगी शांतिनाथ ही महंत अवेद्यनाथ महाराज को गोरखपुर लेकर आए थे। वहीं, योगी निवृत्तनाथ, जो स्वयं योगीराज बाबा गंभीरनाथ के शिष्य थे, अपने समय के दो महान संतों के मार्गदर्शक बने—
- महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज – तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर, जिन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाबा गंभीरनाथ ने उन्हें गोरखनाथ मंदिर की व्यवस्था का दायित्व सौंपा और एक लिखित अनुबंध के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि वे इस पवित्र स्थल का संरक्षण करें।
- स्वामी प्रणवानंद जी – भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक, जिन्होंने 1912 में मात्र 12-13 वर्ष की आयु में योगीराज बाबा गंभीरनाथ से दीक्षा ली थी। भारत सेवाश्रम संघ न केवल एक आध्यात्मिक संगठन है, बल्कि राष्ट्रीय चेतना जागृत करने में भी अग्रणी रहा है।
योगीराज बाबा गंभीरनाथ की आध्यात्मिक सिद्धियाँ
योगीराज बाबा गंभीरनाथ की आध्यात्मिक सिद्धियों और चमत्कारों से जुड़ी कई मान्यताएँ प्रचलित हैं, जिनका उल्लेख योगीराज बाबा गंभीरनाथ ग्रंथ में किया गया है। वे उच्च कोटि के साधक थे, जिन्होंने कभी अपनी सिद्धियों का प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन जब भी किसी भक्त को सहायता की आवश्यकता हुई, उन्होंने बिना संकोच सहायता की।
गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखनाथ पीठ, और योग परंपरा से जुड़े इन महान संतों की शिक्षाएँ आज भी समाज को आध्यात्मिक और राष्ट्रीय चेतना की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं।


