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सिद्धार्थनगर: सांसद जगदंबिका पाल मृतक दंपति के परिजनों से मिले

Siddharthnagar: MP Jagdambika Pal met the family members of the deceased couple

Sidharthnagar:सिद्धार्थनगर जिले के नगर पंचायत बढ़नी में दवा कारोबारी मदन मोहन अग्रवाल और उनकी पत्नी अंजू अग्रवाल की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मृत्यु के बाद से क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है। यह दर्दनाक हादसा बीते गुरुवार को घटित हुआ, जिसने पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया।

इस दुखद घटना की सूचना मिलते ही डुमरियागंज के लोकप्रिय सांसद जगदंबिका पाल शनिवार को मृतक दंपति के आवास पर पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी और इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने का हर संभव भरोसा दिलाया।


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सांसद पाल ने कहा कि दुख की इस घड़ी में परिवार अकेला नहीं है, सरकार और प्रशासन हर तरीके से सहायता के लिए तत्पर रहेगा। उन्होंने परिजनों को आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन दिया।

इस मौके पर भाजपा नेत्री और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष साधना चौधरी, राजकुमार उर्फ राजू शाही, सिद्धार्थ पाठक, सूर्यप्रकाश पांडेय, अनिल अग्रहरि सहित कई स्थानीय भाजपा नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने मृतक आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

यह मामला अब जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया है, और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की जा रही है।

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_____________________________________________________________________________________________ जनस्वराज हिंदी की संपादक प्रगति गुप्ता एक पत्रकार के साथ ही लेखिका भी हैं। सामाजिक विषयों, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन मुद्दों पर उनकी लेखनी विशेष पहचान रखती है। 'आवाज़ें ज़िंदा हैं' उनकी साहित्यिक अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अभी खरीदें यदि आप ऐसी कविताएं पढ़ना चाहते हैं जो दिल को छू जाएं और मन में नई ऊर्जा भर दें, तो 'आवाज़ें ज़िंदा हैं' आपके लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है। यह पुस्तक Amazon पर उपलब्ध है। आज ही अपनी प्रति मंगवाएं और शब्दों की इस संवेदनशील यात्रा का हिस्सा बनें। निचे लिंक पर क्लिक कर आर्डर करें. Purchase 'आवाज़ें ज़िंदा हैं'

Pragati Gupta

प्रगति गुप्ता दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर कर चुकी हैं। इसके अलावा इन्हें साहित्य में रुचि है और कविताएँ लिखने का भी शौक है। वर्तमान में प्रगति जनस्वराज हिन्दी के संपादक के तौर पर काम कर रहीं हैं।

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