अमेरिका के पारस्परिक टैरिफ से भारत के व्यापार पर असर पड़ने की आशंका

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि भारत को टैरिफ में कोई रियायत नहीं मिलेगी। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ पारस्परिक (reciprocal) टैरिफ नीति अपनाएगा, यानी भारत जितना शुल्क अमेरिका पर लगाएगा, अमेरिका भी उतना ही शुल्क भारत पर लगाएगा।

हाल ही में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान, ट्रंप ने पूरे विश्व पर “पारस्परिक टैरिफ” लगाने की अपनी योजना का खुलासा किया , कहा  “आप जो भी शुल्क लगाएँगे, मैं भी वही शुल्क लगाऊंगा”……………….

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर असहमति जताई, लेकिन ट्रंप ने कहा कि वे यही नीति सभी देशों पर लागू कर रहे हैं।

भारत ने हाल ही में बोरबॉन व्हिस्की जैसे कई अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम किया था, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते में रियायतें मिल सकें। लेकिन अमेरिकी सरकार और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने भारत के टैरिफ को “अनुचित” बताया है। मस्क ने कहा कि भारत में आयात शुल्क लगभग 100% तक पहुंच सकता है, जिससे अमेरिकी कंपनियों के लिए व्यापार मुश्किल हो जाता है।

भारत को कितना नुकसान हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के टैरिफ दरें अमेरिका से अधिक हैं, खासकर कृषि उत्पादों, वस्त्रों और दवाओं पर। अगर अमेरिका भारत के टैरिफ के बराबर शुल्क लगाए, तो इससे व्यापार और महंगा हो सकता है। गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की नई टैरिफ नीति से भारत की GDP वृद्धि 0.1 से 0.3 प्रतिशत अंक तक घट सकती है।

अगर अमेरिका सभी देशों पर समान रूप से वैश्विक टैरिफ लागू करता है, तो भारत का निर्यात और प्रभावित हो सकता है। इस स्थिति में भारत की GDP वृद्धि पर 0.1 से 0.6 प्रतिशत अंक तक का असर पड़ सकता है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार अधिशेष $35 बिलियन तक पहुंच चुका है, जो भारत के GDP का लगभग 1% है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को व्यापार वार्ता के दौरान अधिक रियायतें पाने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि अमेरिकी टैरिफ से बचा जा सके।

 

 

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Saloni Vishwakarma

सलोनी विश्वकर्मा (Saloni Vishwakarma) दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहीं हैं। सलोनी को क्राइम, धर्म-शास्त्र की खबरों में रूचि है। इन्हें ब्लॉगिंग का भी शौक है।

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