समाधान दिवस इस बार महज़ एक औपचारिकता, अधिकांश हिस्सा खाली नज़र आया

सेवराई। स्थानीय तहसील सभागार कक्ष में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस इस बार महज़ औपचारिकता बनकर रह गया। अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण जनता की समस्याओं का समाधान तो दूर, उनकी बात सुनने वाला तक सभागार में मौजूद नहीं था।
कार्यक्रम निर्धारित समय पर शुरू तो हुआ, लेकिन उपजिलाधिकारी कुछ देर बाद किसी अन्य महत्वपूर्ण कार्य का हवाला देते हुए समाधान दिवस से उठकर चले गए। उनके जाने के बाद पूरा दायित्व खंड विकास अधिकारी भदौरा के कंधों पर आ गया, जिन्होंने उपस्थित लोगों की समस्याएँ सुनने की औपचारिकता तो निभाई, पर समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी।
सभागार कक्ष का अधिकांश हिस्सा खाली नज़र आया। अधिकारियों के लिए लगाई गई दर्जनों कुर्सियों में से केवल एक-दो पर ही लोग बैठे थे, जबकि बाकी खाली पड़ी कुर्सियाँ व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही थीं। ग्रामीण अपनी समस्याएँ लेकर घंटों इंतज़ार करते रहे, पर संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुँचे ही नहीं।

समाधान दिवस में पहुंचे शबनम खातून बारा, अंशु बीरूउपुर, सुरेंद्र यादव मगरखाई आदि ने बताया कि समाधान दिवस का उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद बनाना है, लेकिन जब अधिकारी समय पर उपस्थित ही न हों, तो शिकायतें कौन सुनेगा और समाधान कैसे होगा? फरियादियों ने बताया कि किसी को दिये गए प्रार्थना पत्र का कोई रिसीविंग रसीद भी नहीं डित गया । लोगो ने बताया कि सोमवार को रसीद देने के लिए बुलाया गया है । उपस्थित ग्रामीणों ने इस उदासीन रवैये पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि स्थिति यही रही तो संपूर्ण समाधान दिवस का कोई औचित्य ही नहीं बचेगा। इस संदर्भ में जब उपजिलाधिकारी संजय यादव से बात किया तो उन्होंने कहा कि सभी फरियादियों को अभी भेजिए सभी लोगों को रसीद दिलवाने के लिए बोल रहा हूं ।

Don't try, this is illigal.