कुशीनगर: बाढ़ प्रबंधन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक सम्पन्न, जमीनी तैयारियों पर विशेष जोर
Kushinagar: High level meeting on flood management concluded, special emphasis on ground preparations
कुशीनगर: उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मा0 उपाध्यक्ष एवं मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल योगेन्द्र डिमरी (पीवीएसएम, बीएसएम) की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में बाढ़ प्रबंधन को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में बाढ़ से निपटने की तैयारियों की गहन समीक्षा की गई।
बाढ़ से निपटने की जमीनी तैयारियों पर दिया गया बल
मा0 उपाध्यक्ष ने कहा कि केवल जिला स्तर की तैयारियां पर्याप्त नहीं हैं, जब तक तहसील एवं गांव स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होता। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 118 तहसीलें और 2500 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आते हैं, ऐसे में हर स्तर पर सटीक और संवेदनशील योजना की आवश्यकता है।
उन्होंने बाल्मीकि नगर बैराज से आने वाले पानी के प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए सभी अधिकारियों को हर समय सतर्क रहने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि “आपदा प्रबंधन में सफलता जमीनी स्तर पर तत्परता से जुड़ी होती है।”
जन जागरूकता और सुरक्षा बोर्ड लगाने के निर्देश
मा0 उपाध्यक्ष ने बताया कि बाढ़ से कम, लेकिन नदी-नालों में नहाते समय बच्चों की डूबने से ज्यादा मौतें होती हैं। ऐसे में जन-जागरूकता बढ़ाने, स्कूलों और माता-पिता के माध्यम से बच्चों को सचेत करने और खतरनाक स्थलों पर चेतावनी बोर्ड लगाने के सख्त निर्देश दिए गए।
इसके अलावा बिजली गिरने के खतरे के दौरान खेतों में काम करने वालों को भी जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया।
जिलाधिकारी ने दी बाढ़ प्रबंधन की विस्तृत जानकारी
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि जनपद के नदी पार स्थित 12 गांवों में से 6 गांव गैर-आबाद हैं, जहां हर साल बाढ़ का खतरा बना रहता है। इन गांवों को स्थायी समाधान के तहत विस्थापित कर पट्टा आवंटन की प्रक्रिया चलाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में नदी का जल प्रवाह 97,000 क्यूसेक है, जो कि नियंत्रण में है। फिर भी प्रशासन की ओर से लगातार नजर रखी जा रही है।
जिलाधिकारी ने बताया कि माइक्रोप्लान के तहत आपात स्थिति में कार्यरत सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम प्रधानों के मोबाइल नंबर संकलित किए गए हैं ताकि त्वरित समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
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विभिन्न विभागों की तैयारी
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राहत शिविरों और बाढ़ चौकियों की स्थापना।
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चिकित्सकों की तैनाती, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता।
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पशु पालकों के लिए चारा एवं भूसा की व्यवस्था।
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गर्भवती महिलाओं के लिए आशाओं के माध्यम से डिलीवरी पूर्व सूचना प्रणाली।
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डीजल, जनरेटर और राशन वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था।
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जर्जर विद्यालयों एवं जलभराव प्रभावित स्कूलों की पहचान कर वैकल्पिक व्यवस्था।
सीडीओ ने विभागीय समन्वय पर दिया जोर
मुख्य विकास अधिकारी गुंजन द्विवेदी ने कहा कि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही आपदा की किसी भी स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है।
बैठक में मौजूद प्रमुख अधिकारी
अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा, एसडीएम खड्डा व तमकुहीराज, परियोजना निदेशक पीयूष, डीडीओ अरुण पाण्डेय, डीसी मनरेगा राकेश, बीएसए रामजियावन मौर्य, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड, सिंचाई, विद्युत, पीडब्ल्यूडी समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


