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गोरखपुर विश्वविद्यालय में सोशियोलॉजिकल डिस्कोर्स इन इंडियन नॉलेज सिस्टम विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी सम्पन्न

IIRF Ranking 2025 : गोरखपुर विश्वविद्यालय ने पत्रकारिता के बाद बीसीए में प्रथम स्थान बीबीए DDUGU गोरखपुर विश्वविद्यालय

IIRF Ranking 2025 : गोरखपुर विश्वविद्यालय

गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित “सोशियोलॉजिकल डिस्कोर्स इन इंडियन नॉलेज सिस्टम” विषयक द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों को समझना और वैश्विक संदर्भ में इसके महत्व को स्थापित करना था।

समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय उपस्थित रहीं, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में आयरलैंड में भारत के राजदूत श्री अखिलेश मिश्र ने अपने विचार साझा किए। संगोष्ठी का आयोजन संवाद भवन में हुआ और इसकी अध्यक्षता प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी ने की।


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भारतीय ज्ञान परंपरा की अनूठी विशेषताएं

मुख्य अतिथि प्रो. कीर्ति पांडेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का दायरा चिकित्सा, ज्योतिष, आध्यात्म, विज्ञान और कला तक फैला हुआ है। यह ज्ञान वेदों, उपनिषदों और पुराणों में समाहित है। भारतीय संस्कृति में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को जीवन के चार महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में बताया गया है, जो परस्पर जुड़े हुए हैं।

मुख्य वक्ता अखिलेश मिश्र ने कहा कि भारत में बौद्धिक विमर्श भारतीय ज्ञान परंपरा के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने समानता, समावेशिता और लोकतंत्र को भारतीय समाज की बुनियाद बताया और कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।

प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी ने क्या कहा?

प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में छिपे अनमोल रत्नों को पुनः खोजने और संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने विविधता में एकता के भारतीय दृष्टिकोण पर बल दिया और कहा कि भले ही भारतीय संस्कृति बाहरी रूप से विविध दिखती हो, लेकिन मूल रूप से सभी विचारधाराएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

संगोष्ठी के दौरान निदेशक प्रो. अनुराग द्विवेदी ने इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। डॉ. मनीष पांडेय ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. समृद्धि सिंह ने समापन सत्र का संचालन किया। डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।


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छः देशों के विद्वानों ने लिया भाग

इस संगोष्ठी में भारत सहित छह से अधिक देशों के विद्वानों ने भाग लिया। आईसीएसएसआर, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में कुल 06 तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ, जिनमें 60 से अधिक विशेषज्ञों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। इस संगोष्ठी में प्रो. बेंशन अगया (यूनिवर्सिटी ऑफ नैरोबी, केन्या), प्रो. सरथ अमरसिंगे (रूहुना यूनिवर्सिटी, श्रीलंका), प्रो. उद्धव पयाकुरेल (काठमांडू यूनिवर्सिटी, नेपाल), प्रो. क्रिस रामप्रसाद (त्रिनिदाद एंड टोबैगो) ने प्रतिभाग किया।

इंडिजिनस नॉलेज सिस्टम पर विशेष सत्र

इंडिजिनस नॉलेज सिस्टम पर आधारित सिम्पोजियम की अध्यक्षता अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने की। इस सत्र में प्रो. अनिल कुमार सिंह झा (दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया), प्रो. जी.एन. निम्बर्टे (वीएनआईटी, ग्वालियर), प्रो. अनिल कुमार (हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, शिमला), डॉ. क्रिस रामपरसाद (त्रिनिदाद एंड टोबैगो) और प्रो. प्रमोद कुमार गुप्ता (लखनऊ विश्वविद्यालय) ने अपने विचार व्यक्त किए।

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