तुर्कपट्टी/कुशीनगर: थाना क्षेत्र इन दिनों अवैध शराब के खुलेआम कारोबार के कारण चर्चा में है। बाजारों से लेकर गांवों तक हर कोने में नशे का यह धंधा तेजी से फैलता जा रहा है। गुरवलिया, राजापाकड़, उजारनाथ, मधुरिया और तुर्कपट्टी बाजार में चाय, चखना और होटल की दुकानों ने शराब बिक्री के गैरकानूनी केंद्रों का रूप ले लिया है।
स्थानीय सूत्रों की मानें तो दुकानों पर देशी से लेकर विदेशी ब्रांड और बीयर तक खुलेआम बिक रही हैं। ग्राहक को शराब ठेके तक जाने की भी जरूरत नहीं, दुकानों में बैठे-बैठे ही जाम परोसे जा रहे हैं। बस निर्धारित मूल्य से कुछ रुपये अधिक चुकाने होते हैं।
बता दें कि शाम ढलते ही इन दुकानों के आगे शराबियों की भीड़ लग जाती है। नशे में धुत्त युवाओं के झुंड सड़क किनारे हंगामा करते हैं, जिससे महिलाओं, बच्चों और आम लोगों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ता है। दुकानों के आगे और पीछे फैली खाली बोतलें और बीयर कैन इस बात का प्रमाण हैं कि यह अवैध व्यापार बड़े पैमाने पर संचालित हो रहा है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब कुछ पुलिस की जानकारी में होने के बावजूद कार्रवाई लगभग न के बराबर है। विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि स्थानीय दरोगा और सिपाही दुकानदारों से हर महीने 1000 से 1500 रुपये तक वसूलते हैं, जिससे उन्हें पुलिस संरक्षण मिलता है।
इस मासिक सुविधा शुल्क के बदले न तो अवैध कारोबार पर रोक लगाई जाती है और न ही दुकानदारों पर कोई कठोर कार्रवाई होती है। यह ‘मूक समझौता’ प्रशासनिक व्यवस्था की साख पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
युवाओं की बर्बादी पर चिंता
क्षेत्र में नशे की गिरफ्त में तेजी से आ रहे युवाओं को लेकर अभिभावकों में गहरी चिंता है। कई बार स्थानीय लोगों ने प्रशासन से लिखित और मौखिक शिकायतें की हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और पुलिस मिलकर इस नशे के कारोबार पर रोक लगाएंगे या यूं ही समाज को गर्त में गिरने देंगे?

