लखनऊ(हेमा शर्मा): राजधानी लखनऊ में 22 अगस्त से तीन दिवसीय राष्ट्रीय नवजात चिकित्सा सम्मेलन (IAP Neocon 2025) आयोजित किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित मेडिकल कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के नामचीन बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatricians) और नवजात स्वास्थ्य विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। मुख्य फोकस उत्तर प्रदेश की उच्च शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate – IMR/NMR) को कम करने और नवजात शिशुओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर होगा।
यूपी में शिशु मृत्यु दर चिंता का विषय
आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में नवजात मृत्यु दर (NMR) 25 प्रति 1,000 जीवित जन्म है, जबकि राष्ट्रीय औसत 17 है। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के मानकों से काफी अधिक है। सम्मेलन का उद्देश्य इस दर को 12 या उससे कम करना है, ताकि यूपी और भारत दोनों वैश्विक हेल्थ टारगेट्स के अनुरूप आगे बढ़ सकें।
डॉक्टरों की भारी कमी बनी चुनौती
प्रदेश में करीब 10 करोड़ बच्चों की आबादी है, लेकिन उनके लिए केवल 2,500 पेडियाट्रिशियन उपलब्ध हैं। यह गंभीर असमानता शिशु मृत्यु दर के पीछे की बड़ी वजह मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं का कमजोर ढांचा और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का अभाव नवजात मृत्यु दर को बढ़ाता है।
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सम्मेलन में होंगे अहम निर्णय
IAP Neocon 2025 लखनऊ में आयोजित इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी:
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नवजात देखभाल से जुड़ी नई नीतियां और रणनीतियां
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अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग
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चिकित्सा कर्मियों के प्रशिक्षण पर जोर
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स्वास्थ्य ढांचे का ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विस्तार
विशेषज्ञों का मानना
विशेषज्ञों के अनुसार, स्वास्थ्य कर्मियों का बेहतर प्रशिक्षण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान ही शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने की कुंजी है।
क्यों है यह सम्मेलन खास?
यह सम्मेलन केवल एक चिकित्सकीय औपचारिकता नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश और पूरे देश के लाखों शिशुओं को सुरक्षित और स्वस्थ बचपन देने की दिशा में ठोस कदम है।

