News Desk (संजना): भारतीय कराटे विशेषज्ञ और तमिल फिल्म अभिनेता शिहान हुसैनी का 60 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे रक्त कैंसर और प्लास्टिक एनीमिया जैसी दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने मार्शल आर्ट्स, तीरंदाजी, अभिनय और सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
शिहान हुसैनी: जीवन परिचय और करियर
शिहान हुसैनी का जन्म 28 दिसंबर 1964 को मद्रास (अब चेन्नई), भारत में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध कराटे विशेषज्ञ थे और उन्होंने युवा एवं वरिष्ठ मार्शल आर्ट सेनानियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक कराटे स्कूल स्थापित किया था।
उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत प्रसिद्ध निर्देशक के. बालाचंदर की फिल्म “पुन्नी मन्नन” से की थी। इसके बाद वे 1988 की हॉलीवुड फिल्म “ब्लू स्टोन” और 1990 की तमिल फिल्म “उन्नीई मिल्लाई” में नजर आए। हालांकि, कुछ फिल्में जैसे “नाडोडिगल” और “रविचंद्र” रिलीज नहीं हो पाईं।
जयललिता के लिए अटूट समर्पण
शिहान हुसैनी तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के कट्टर समर्थक थे। 2004 में, उन्होंने जयललिता के 56वें जन्मदिन पर अपने खून से उनकी 56 पेंटिंग बनाई थीं। इसके अलावा, 2013 में, उन्होंने जमा हुए खून से जयललिता की एक प्रतिमा का अनावरण किया, जिसके लिए उन्होंने 11 लीटर रक्त एकत्र किया था।
खुद को लोहित क्रूसिफिक्शन (क्रॉस पर लटकने) का साहसिक प्रदर्शन
फरवरी 2015 में, हुसैनी ने 6 इंच की कीलें अपने हाथ-पैरों में ठोंककर 6 मिनट तक लटकने का साहसिक प्रदर्शन किया। इस स्टंट के बाद उन्हें गंभीर चोटें आईं और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था।
तीरंदाजी संघ के महासचिव और शेफ के रूप में योगदान
हुसैनी तमिलनाडु तीरंदाजी संघ के संस्थापक और महासचिव थे, जो भारतीय तीरंदाजी संघ और तमिलनाडु ओलंपिक संघ से मान्यता प्राप्त था। इसके अलावा, वे एक पेशेवर शेफ भी थे और मेगा टीवी के शो “अथिराडी समायल” की मेजबानी करते थे।
अंतिम यात्रा और श्रद्धांजलि
25 मार्च 2025 को चेन्नई में 60 वर्ष की आयु में हुसैनी का निधन हो गया। उनका जीवन साहस, समर्पण और समाज सेवा का प्रतीक था। उनके निधन से मार्शल आर्ट, तीरंदाजी और तमिल फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई।

