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गाजीपुर में ‘दशरथ मांझी’ बना आर्मी जवान, 70 लाख की लागत से बना रहे पुल

गाजीपुर में 'माउंटेन मैन' की तरह आर्मी जवान ने उठाया बड़ा कदम, 70 लाख की लागत से बना रहे पुल

Ghazipur News: बिहार के माउंटेन मैन दशरथ मांझी को कौन नहीं जानता, जिन्होंने अकेले अपने दम पर पहाड़ काटकर सड़क बना दी थी। कुछ ऐसा ही काम अब गाजीपुर के आर्मी जवान रविंद्र यादव कर रहे हैं। उन्होंने बिना सरकारी मदद के गाजीपुर के नोनहरा थाना क्षेत्र के पयामपुर छावनी गांव और आसपास के 15 गांवों को जोड़ने के लिए मगई नदी पर पुल बनाने का संकल्प लिया।

बगैर सरकारी बजट, गांववालों के सहयोग से बन रहा पुल

रिटायर्ड आर्मी इंजीनियर रविंद्र यादव ने अपने रिटायरमेंट के 10 लाख रुपये इस पुल के निर्माण में लगा दिए। इसके अलावा, गांववालों से 60-70 लाख रुपये चंदा जुटाया गया। जो लोग आर्थिक मदद नहीं कर सके, उन्होंने श्रमदान कर पुल के निर्माण में हाथ बंटाया।


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क्यों जरूरी है यह पुल?

कैसे शुरू हुआ पुल निर्माण?

जनप्रतिनिधियों से नहीं मिली मदद

रविंद्र यादव का गांव भले ही गाजीपुर जिले में आता हो, लेकिन लोकसभा बलिया और विधानसभा मोहम्मदाबाद के अंतर्गत आता है। गांववालों ने कई वर्षों तक जनप्रतिनिधियों से पुल निर्माण की मांग की, लेकिन किसी ने ठोस कदम नहीं उठाया। यहां तक कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, जो गाजीपुर से सांसद और रेल राज्य मंत्री भी रह चुके हैं, उनके गांव के पास ही यह गांव स्थित है, फिर भी सरकारी मदद नहीं मिली।

105 फीट लंबा पुल, पूरी तरह जनता के सहयोग से बन रहा

रविंद्र यादव, जो सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक भी हैं, आर्किटेक्ट की मदद से पुल का निर्माण करा रहे हैं।

बाढ़ में टूट जाता था लकड़ी का पुल, घंटों इंतजार करते थे लोग

हर साल बाढ़ के समय, लकड़ी का पुल बह जाता था, और गांववालों को एकमात्र नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ती थी। इससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

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