देवरिया (अभिषेक कुमार): वृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा संचालित गृहे-गृहे संस्कृतम् योजना के तहत नवंबर मास में आयोजित 12 दिवसीय संस्कृत शिक्षण शिविर का सफल समापन हुआ। यह शिविर 05 नवंबर से 21 नवंबर 2024 तक प्रदेश के विभिन्न जनपदों में संचालित हुआ, जिसमें 45 प्रशिक्षकों ने सरल संस्कृत शिक्षण कक्षाओं का समुचित संचालन किया।
कार्यक्रम के निदेशक श्री विनय श्रीवास्तव ने कहा कि गृहे-गृहे संस्कृतम् योजना के माध्यम से संस्कृत भाषा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का कार्य सफलतापूर्वक हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर इंटर कॉलेज तक छात्र-छात्राएँ उत्साहपूर्वक संस्कृत भाषा का अध्ययन कर रहे हैं।
संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री दिनेश मिश्र ने प्रशिक्षकों के अथक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह योजना संस्कृत भाषा को सरल और सुगम बनाकर अधिक लोगों तक पहुँचाने में सफल हो रही है। उन्होंने ऑनलाइन संस्कृत सम्भाषण योजना को भी एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी श्री जगदानंद झा ने कहा कि गृहे-गृहे संस्कृतम् योजना न केवल शहरी क्षेत्रों में, बल्कि ग्रामीण स्तर पर भी संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार कर रही है। यह योजना संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने में विशिष्ट भूमिका निभा रही है।
देवरिया जनपद के प्राथमिक विद्यालय, नगरौली बाजार (गौरीबाजार) में आयोजित समापन कार्यक्रम में प्रधानाध्यापिका नुजहत फातमा ने दीप प्रज्वलित कर और माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके शुभारंभ किया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। केंद्र संचालन संस्थान की शिक्षिका बबीता मौर्या ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण से हुआ, जिसका वाचन प्रशिक्षक गरुण मिश्र ने किया। संस्थान गीतिका का प्रस्तुतिकरण शिक्षक विपिन कुमार द्वारा किया गया। मंच संचालन श्रीमती सविता मौर्या ने किया। समापन सत्र में संस्थान के कर्मचारी श्री महेंद्र पाठक, श्री नितेश श्रीवास्तव, श्रीमती पूनम मिश्रा, श्री ऋषभ पाठक, श्री शांतनु मिश्र, श्री शिवम गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
योजना के प्रदेश समन्वयक डॉ. अनिल गौतम ने समागत अतिथियों का स्वागत करते हुए योजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति और संस्कार का समन्वित रूप है, जो जीवन को सुसभ्य बनाती है और नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ती है।
इस अवसर पर ऑनलाइन समन्वयक श्री धीरज मौठाणी ने योजना का विषय प्रस्तुतीकरण किया और ऑनलाइन प्रशिक्षक श्री शिवप्रताप मिश्र ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह योजना संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु एक महत्त्वपूर्ण पहल है।
शिक्षिका शिवा यादव ने शांति मंत्र के माध्यम से कार्यक्रम का समापन किया। समापन समारोह में सभी शिक्षकों और छात्रों ने अपनी उत्साही भागीदारी दिखाई।

