
पर्व के अवसर पर मुस्लिम बहुल इलाकों में सुबह से ही चहल-पहल देखी गई। लोगों ने अपने घरों और धार्मिक स्थलों की साफ-सफाई कर उन्हें आकर्षक ढंग से सजाया। लोगों ने एक-दूसरे को पर्व की मुबारकबाद दी।
जगह-जगह नातिया कलाम और तकरीर के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जीवन, उनके संदेश, इंसानियत, भाईचारे और आपसी सौहार्द की शिक्षा पर प्रकाश डाला गया।
तहसील क्षेत्र के गोड़सरा सहित कई स्थानों से अकीदतमंदों द्वारा जुलूस निकाले गए। बड़ी मस्जिद गोड़सरा के इमाम मोहम्मद फैज मिस्बाही और कारी अहमद रजा खान के नेतृत्व में भी एक जुलूस निकाला गया।
जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। लोग धार्मिक झंडे लेकर नारे लगाते और नातिया कलाम पढ़ते हुए निर्धारित मार्गों से गुजरे। इस दौरान क्षेत्र का माहौल पूरी तरह धार्मिक और उत्सवी बना रहा।
पर्व को देखते हुए तहसील प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, और अधिकारियों ने क्षेत्र में भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लिया। जुलूस के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी पुलिसकर्मी मुस्तैद रहे।
बड़ी मस्जिद गोड़सरा के इमाम मोहम्मद फैज मिस्बाही ने लोगों से शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में पर्व मनाने की अपील की। उन्होंने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के प्रेम, शांति, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद करने के संदेश को दोहराया।
पर्व के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने देश और समाज में अमन-चैन, खुशहाली एवं आपसी भाईचारे की दुआ की। देर शाम तक विभिन्न स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा।
इस मौके पर जमशेद खान, मेराज खान, मिनहाज, जियाउद्दीन, उमर खान, सगफ खान, फकरेआलम, मुमताज, तबरेज, अरमान, तुफैल खान, राजू खान,फैजान खान,मोईन खान,आदि लोग मौजूद रहे।

