न्यूज़ डेस्क(शशांक पाण्डेय): गोरखपुर स्थित 26वीं पीएसी बटालियन ट्रेनिंग सेंटर में बुधवार को एक बड़ा हंगामा देखने को मिला, जब लगभग 600 महिला सिपाहियों ने बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
“मांगा पानी, तो मिली गालियां”—यह बयान सोशल मीडिया और खबरों में तेजी से वायरल हो गया है। मामला इतना गंभीर हो गया कि एडीजी, एसएसपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और छह घंटे से अधिक समय तक सिपाहियों को शांत करने की कोशिश करते रहे।
क्या है पूरा मामला?
महिला सिपाहियों का आरोप है कि ट्रेनिंग कैंपस में न तो पीने का साफ पानी मिल रहा है, न समय पर खाना, और न ही पर्याप्त स्वच्छता की व्यवस्था।
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360 की क्षमता वाले सेंटर में 600 प्रशिक्षु जबरन ठूंसे गए हैं।
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हर सिपाही को सिर्फ 500 एमएल पानी दिया जा रहा है, जिससे डिहाइड्रेशन और बेहोशी की शिकायतें सामने आईं।
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बाथरूम की संख्या बेहद कम है, जिससे लंबी कतारों में लगना पड़ता है और कई बार खुले में नहाने की मजबूरी होती है।
स्वास्थ्य बिगड़ने पर पांच भर्ती
इस गंभीर उपेक्षा के कारण कई महिला सिपाहियों की तबीयत बिगड़ गई।
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डिहाइड्रेशन और मानसिक तनाव के चलते पांच सिपाहियों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
कैमरे विवाद से बढ़ा बवाल
प्रशिक्षुओं ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि बाथरूम की गैलरी में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे उनकी निजता भंग हो रही है।
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महिला सिपाहियों ने सवाल उठाया, “अगर हमारे वीडियो रिकॉर्ड हुए हैं, तो उनका क्या होगा?“
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प्रशासन ने जांच के बाद कैमरे की मौजूदगी से इनकार किया, लेकिन तब तक तनाव काफी बढ़ चुका था।
PTI सस्पेंड, आदेश वापस
विवाद बढ़ने पर एक फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर (PTI) को अशोभनीय भाषा के उपयोग पर निलंबित कर दिया गया।
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इसी दौरान यह खुलासा भी हुआ कि ट्रेनिंग शुरू होने से पहले महिला सिपाहियों की प्रेग्नेंसी जांच कराई जा रही थी।
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डीआईजी के आदेश पर किया गया यह परीक्षण बवाल की जड़ बन गया।
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बाद में IG ट्रेनिंग ने हस्तक्षेप कर यह आदेश रद्द किया और स्पष्ट किया कि अविवाहित महिलाओं पर यह जांच अनिवार्य नहीं है।
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️ राजनीतिक घमासान भी शुरू
घटना की गूंज लखनऊ तक पहुंची, जहां सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला।
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उन्होंने कहा, “जब मुख्यमंत्री के अपने शहर में महिला पुलिस की यह स्थिति है, तो बाकी प्रदेश की कल्पना कीजिए। भाजपा की ‘नारी वंदना’ सिर्फ एक जुमला है।“
मुख्यमंत्री गोरखपुर में ही मौजूद
यह पूरी घटना तब हुई, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में ही थे और अगले दिन 252 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण करने वाले थे।
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ऐसे में प्रशासन ने हर कीमत पर विवाद को शांत करने की कोशिश की, लेकिन सवाल अब भी कायम हैं।
आख़िर कब मिलेगा महिला सिपाहियों को सम्मान?
इस घटना ने उत्तर प्रदेश पुलिस की प्रशिक्षण प्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
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क्या वर्दी पहनने का सपना देखने वाली बेटियों को बुनियादी सुविधाएं और सम्मान नहीं मिल सकता?
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अगर पानी मांगने पर गालियां मिलती हैं, तो भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था कैसे मजबूत होगी?
सुधार की ज़रूरत, भरोसे की बहाली
यह घटना सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक व्यवस्था पर अविश्वास की चीख है। सरकार और पुलिस प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि
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महिला सिपाहियों को सुरक्षा, सुविधा और सम्मान मिले।
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और भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।
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