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गोरखपुर: फसल अवशेष प्रबंधन से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता और होगा पर्यावरण संरक्षण

गोरखपुर कृषि समाचार

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गोला (गोरखपुर): कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसल अवशेष (Crop Residue) खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और पर्यावरण प्रदूषण रोकने में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि कटाई के बाद फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में पलटकर खाद (Organic Compost) तैयार करें।

फसल अवशेष जलाना क्यों है नुकसानदायक?

सरकार की सख्ती और जुर्माने की व्यवस्था

फसल अवशेष जलाना अब दंडनीय अपराध है। सरकार ने इसके लिए जुर्माना तय किया है:

अवशेष प्रबंधन की बेहतर तकनीकें

पूर्व जिला कृषि अधिकारी राम अधार यादव ने किसानों को बताया कि अवशेष प्रबंधन से न केवल भूमि की उर्वरता (Soil Fertility) बढ़ती है, बल्कि पैदावार भी दोगुनी हो सकती है।

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किसानों की आय बढ़ाने का जरिया

फसल अवशेषों से बनी जैविक खाद:

प्राकृतिक खेती से होगा स्वास्थ्यवर्धक अन्न उत्पादन

ग्राम पंचायत स्तरीय कृषक गोष्ठी, प्राथमिक विद्यालय बनवारपार, ब्लॉक गोला में आयोजित हुई। इसमें कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती (Natural Farming) से पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न उत्पादन संभव है। किसानों को जैविक खाद और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई।

कार्यक्रम में शामिल रहे

गोष्ठी की अध्यक्षता ग्राम प्रधान प्रकाश गौतम ने की और संचालन बृजेंद्र ने किया। इस अवसर पर प्राविधिक सहायक बृजेंद्र, कृषि सखी उर्मिला, रामवृक्ष यादव, रीता देवी, साधना बिंदु, गीता, करिश्मा, राजमती, त्रिवेणी मौर्य, चौथी यादव, करोड़पति राम लखन, निवेदिता समेत बड़ी संख्या में किसान व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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